पढि़ए प्रतिदिन : एक नया गीत

Tuesday, November 29, 2011

गीत 64 : एकटि एकटि क'रे तोमार

एक-एक कर अपने
खोलो तार पुराने, खोलो तार पुराने
साधो यह सितार, बॉंधकर नए तार।

खत्‍म हो गया दिन का मेला
सभा जुड़ेगी संध्‍या बेला
अंतिम सुर जो छेड़ेगा, उसके
आने की यह आ गई बेला--
साधो यह सितार, बॉंधकर नए तार।

द्वार खोल दो अपने हे
अंधेरे आकाश के ऊपर से
सात लोकों की नीरवता
आए तुम्‍हारे घर में।

इतने दिनों तक गाया जो गान
आज हो जाए उसका अवसान
यह साज है तुम्‍हारा साज
इस बात को ही दो बिसार
साधो यह सितार, बॉंधकर नए तार।

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